Bhagwat Gita

Hello Book Lovers  स्वागत है आप सभी का BrainBook चैनल में, जहाँ आप देख सकते है Complete Book Summaries.

आज हम जिस किताब के बारे में बात करेंगे वो सिर्फ एक किताब नहीं , बल्कि एक ऐसा लेख है जो हमारी ज़िन्दगी में आने वाली हर परेशानी का हल है।

जी हाँ ! हम बात कर रहे हैं भगवद गीता के बारे मे |

श्रीमद भगवद गीता  हिन्दू धर्म की सबसे माननिये और लोकप्रिये शास्त्रो में से एक है। महाभारत का ही एक हिस्सा गीता , एक परेशान और व्याकुल योद्धा अर्जुन और उनके सारथि श्री कृष्ण के बीच का संवाद है।

इस लेख में श्री कृष्ण अर्जुन की परेशानी मिटाने के लिए उन्हें कुछ इस प्रकार सलाह देते है की मानो वो ना सिर्फ अर्जुन से बल्कि हम सबसे बात कर रहे हो।

गीता एक ऐसी किताब है , जो जीवन के रास्ते से भटक जाने वालों को सही रास्ता दिखाती है , व्याकुल और परेशान व्यक्तियों को स्पष्टता प्रदान करती है और दुनिया के हर इंसान को बुद्धिमत्ता और सूज बूझ सिखाती है।

गीता में बताए गए इसी गहरे और आवश्यक ज्ञान को  Brainbook आपके लिए लेकर आया है इस वीडियो में जहाँ हम बात करेंगे गीता से मिलने वाली 8 सबसे महत्वपूर्ण सीखो के बारे मे।

ताकी गीता में बताए गए इन 8 अनमोल ज्ञान को आप सब भी अपनी ज़िंदगियों में ढाल कर आत्म परिक्षण की कला और ज़िन्दगी को सही ढंग से जीने का तरीका सीख पाए ।

पहली सीख : समय का महत्व 

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इस दुनिया में सबसे बहुमूल्य और कीमती कोई धन और दौलत नहीं बल्कि समय है |

क्यूंकि खोया हुआ धन तो परिश्रम और मेहनत से दुबारा पाया जा सकता है , लेकिन खोया हुआ समय कभी भी वापस नहीं पाया जा सकता । ये तो वो  खज़ाना है जो किसी को भी पल में शक्तिशाली या पल में कमज़ोर बना सकता है । हमारी ये  ज़िन्दगी भी रेत की घडी के समान होती है जहाँ नीचे गिरती हुई रेत हमारा अतीत और ऊपर पड़ी हुई रेत हमारा भविष्य होती है । हम ना ही ऊपर की रेत को गिरने से बचा सकते हैं ना ही नीचे की रेत को वापस ऊपर ला सकते हैं , हम जीते हैं तो उस केंद्र उस एक पल में जहाँ से धीरे धीरे करके रेत ऊपर से नीचे गिरती है और इसी को हम वर्तमान कहते हैं ।

यानि हम सभी के पास जीने के लिए ये एक पल है जिसे हम या तो बीती हुई बातों का दुख मनाते हुए बिता सकते है, या जो आने वाला है उसकी प्रतीक्षा करते हुए बेचैनी और क्रोध में गवा सकते हैं । लेकिन जो कुछ भी करना है उसके लिए केवल यही एक पल है , अगर हम सही समय आने के इंतज़ार में ही बैठे रहे तो निरंतर चलने वाला ये पल भी अतीत में बदल जायेगा , इसीलिए ज़िन्दगी में कुछ भी करने के लिए प्रतीक्षा ना  करे उसे उसी पल पूरी निष्ठां और ईमानदारी से करे क्यूंकि समय का सदुपयोग हमेशा तरक्की की ओर ही लेजाता है । कभी भी जीवन में ये नहीं भूलना चाहिए की जो आज हमने हासिल किया है वो सदैव हमारे पास ही रहेगा , जो आज हमारा है वो शायद कल हमारा ना रहे इसीलिए समय का आदर और उसका सही इस्तेमाल करना चाहिए क्युकी समय सबसे बलवान और बहुमूल्य होता है ।

दूसरी सीख : संदेह से ऊपर उठकर चीज़ो को स्वीकार करे 

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दोस्तों हमारी ज़िन्दगी एक गाड़ी की तरह होती है और संदेह उस गाड़ी में लगे ब्रेक की तरह होता है , अक्सर ब्रेक के इस्तेमाल से हम गलत दिशा में जाने से बच तो जातें हैं ,लेकिन अगर हम हर वक़्त अपना पैर ब्रेक पर रखेंगे तो गाड़ी आगे नहीं बढ़ पायेगी | ठीक इसी तरह ज़िन्दगी में हर वक़्त और हर चीज़ पर संदेह करने से हम कभी भी सही निर्णय नहीं ले पाते और ज़िन्दगी में पीछे रह जाते हैं । संदेह हमारी सोच को धुंदला करदेता है और हमे हर चीज़ की पड़ताल करने पर मजबूर करता है , जिस्से हम हर चीज़ और व्यक्ति में खामियां ढूंढ़ने लगते है और कभी भी उन्हें  मन से स्वीकार नहीं कर पाते । यदि हमे ज़िन्दगी में आगे बढ़ना है और कुछ हासिल करना है तो निसंदेह चीज़ो को स्वीकार करना चाहिए ।

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जहाँ सही मात्रा में संदेह एक बुद्धिमान व्यक्ति का चिन्ह माना जाता है वहीँ अत्यधिक संदेह वो ज़हर है जो आपको आगे बढ़ने से रोकता है । इसीलिए चीज़ों और व्यक्तियों की कमिया और कमज़ोरियाँ ढूंढ़ने के बजाये उनकी अच्छाइयों और सकारात्मकता को ना सिर्फ स्वीकार बल्कि अपनाना भी चाहिए क्यूंकि हर चीज़ में संदेह करने वाले व्यक्ति को सुख की असल प्राप्ति नहीं होती । तो अबसे अपने संदेहो पर संदेह करें और अपने विश्वासों पर विश्वास करें , क्यूंकि असली सुख की प्राप्ति उसमे विश्वास करके ही होगी उसपे संदेह करके नहीं ।

तीसरी सीख : विनाश की पहली सीढ़ी है अहंकार 

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क्या कभी आप सब ने सोचा है की हमे इस दुनिया में लाने वाले हम खुद नहीं बल्कि कोई और है , दुनिया में आने के बाद हमे नाम देने वाला भी कोई और है और ज़िन्दगी में हमने जो कुछ भी कमाया वो भी कल किसी और का होगा। तो जब दुनिया में आने से लेकर दुनिया से जाने तक कुछ भी हमारा अपना नहीं है तो चीज़ो पर हम घमंड क्यों करते हैं  ? क्यों अपनी कमियाबियों पर अपनी चीज़ों पर या अपने पैसों पर अहंकार करते है ? जो कुछ भी हमने आज हासिल किया है वो कल शायद हमारा ना रहे , और अगर हमारा भी रहा तो हमारे जाने के बाद वो किसी और का होगा तो जिसपर हमारा पूरा हक़ ही नहीं उसपर घमंड करके क्या फायदा ?

अपनी कमियाबियों और अपनी दौलत को अपना स्वाभिमान मानकर दूसरो को नीचा दिखाने वाले लोग अक्सर यह भूल जाते हैं की जिस दौलत और शोहरत को वो अभिमान से अपना बता रहे हैं वो तो असल में उनकी है ही नहीं । खुद के पास मौजूद कामियाबी से यदि किसी और को छोटा दिखाया जाये तो वो कामियाबी नहीं बल्कि विनाश की सीढ़ी है । अहंकार और घमंड हमारी सोच को दिशाहीन बनाकर हमे बर्बादी की तरफ लेजाता है , जिस सोच के ज़रिये हमने लाखों बुलंदियां हासिल की होती हैं वही सोच अब केवल दूसरों की निंदा और आलोचना में लग जाती है | इतना ही नहीं घमंड के नशे में चूर व्यक्ति सही और गलत की पहचान नहीं कर पता और अपने को दुनिया में सबसे श्रेष्ठ समझने लगता है और ऐसा करने पर उसका गिरना निश्चित है | इसलिए जीवन में सदैव विनम्रता और आदर पूर्वक रहना चाहिए और दुसरे की मदद और उनके सुख में खुश होना चाहिए , क्यूंकि अहंकार, घमंड और इर्षा तो विनाश की पहली सीढ़ी है |

चौथी सीख : गुस्सा मनुष्य को खोखला कर देता है 

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जीवन में कभी ना कभी तो हम सब ने किसी को गुस्से में आकर भला बुरा तो कहा ही होगा । या फिर कभी गुस्से में कोई चीज़ या सामान तोड़ दिया होगा । तो आखिर क्या है ये गुस्सा जो हमसे वो सब करवा बैठता है जो हम करना नहीं चाहते । गीता के अनुसार गुस्सा वो भावना है जो धीरे धीरे मनुष्य को अंदर से खोखला कर देती है । जिस प्रकार लकड़ी पर लगी दीमक धीरे धीरे उसकी मज़बूत लड़की खा कर उसे कमज़ोर और दुर्बल बना देती है ठीक उसी तरह ही गुस्सा इंसान की मानसिक इन्द्रियों पर हावी हो कर उन्हें  खोखला करने लगता है । गुस्से के प्रभाव में आया व्यक्ति ना तो रिश्ते ना ही आदर सम्मान की परवाह करता है , वो तो बेबाक और बेफिक्र होकर खुद को दुसरे से ऊँचा और सही मानने लगता है । गुस्से में व्यक्ति खुद पर से नियंत्रण खो बैठता है और हिंसक और आक्रामक व्यहवार करने लगता है । गुस्से में लिए गए फैसले और गुस्से में किये गए कामो से केवल निराशा और असफलता ही हाथ लगती है । विवेक और सयम खो बैठने पर इंसान धैर्य और सब्र के बांध तोड़ कर गुस्से को खुद पर हावी होने देता है जिसके बाद वो ना तो अपनों का रहता है ना ही स्वयं का । धीरे धीरे गुस्सा इंसान के स्वाभाव में घर कर लेता है उससे अंदर से खोखला और भवनहीन बना देता है इसीलिए सफलता और खुशियों को पाने का सही रास्ता विनम्रता और प्रेम है ना की गुस्सा | जीवन में कभी भी गुस्से को खुद पर हावी ना होने दे , गुस्सा आने पर खुदको शांत और विनम्र रखने का प्रयास करें ऐसा करने से ना सिर्फ आपका गुस्सा कम होगा बल्कि आपका खुदपर नियंत्रण और  आत्मसंयम भी मज़बूत होगा ।

पांचवी सीख : इंसान अपनी सोच का पुतला है 

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दुनिया भर के महानुभावो को जो चीज़ सबसे अलग और महान बनाती है वो है उनकी सोच । हम सबने इस दुनिया में एक सा ही शरीर धारण किया है , हम सब एक ही तरह से इस दुनिया में आये हैं और एक ही तरह से इस दुनिया से जायेंगे | लेकिन इंसान की सोच ही तो वो चीज़ है जो उसे लाखो में सबसे अलग और अनोखा बनती है । हमारी सोच ही हमारा एक मात्र हथियार है जिसके इस्तेमाल से हम बुलंदियों को छू सकते हैं , मुसीबतो से लड़ सकते हैं , और दुनिया के लिए कुछ बड़ा और महत्वपूर्ण कर सकते है ।

हमारी सोच गीली मिटी की तरह होती है जिसे हम हमारे आचरण के अनुसार आकार देते हैं , ठीक उसी तरह जिस तरह एक कुम्हार मटके को आकर देता है । जिस आकार में हम अपनी सोच को ढालेंगे उसी आकार का हमारा आचरण होगा ।

नकारात्मक सोच रखने वाले व्यक्ति अक्सर हर चीज़ को नकारात्मक निगाहों से ही परखते हैं , जिसके चलते वो कभी भी चीज़ों में छुपी अच्छाई और सकारात्मकता को नहीं देख पाते । ऐसे लोग हमेशा निराशा और अफ़सोस में ही रहते हैं । वहीँ दूसरी ओर सकारात्मक सोच रखने वाले व्यक्ति सदा ही चुनौतियों से लड़ कर अपने लक्ष्य को पाते हैं और जीवन में कभी हार नहीं मानते | स्पष्टा , स्थिरता और पूर्णता महान और कामयाब सोच के प्रतीक हैं , इन तीनो खूबियों के मिश्रण से बानी सोच निश्चित रूप से इंसान की सफलता और कामियाबी का कारन बनती है ।  हमें हमेशा ये ध्यान रखना चाहिए की जैसा हम सोचेंगे वैसे ही हम बनेंगे इसीलिए हमेशा ही एक स्पष्ट , स्थिर और पूर्ण सोच और आचरण रखना चाहिए क्यूंकि दुनिया बदलने के लिए किसी दौलत या अन्य साधन की ज़रूरत नहीं , ज़रूरत है तो एक क्रन्तिकारी सोच की क्यूंकि सफलता और असफलता केवल हमारी सोच है , यदि हम खुदसे हार ना माने तो कभी पराजित नही हो सकते l

छठी सीख : मुसीबतों से सीखे 

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जीवन में कईं बार हम खुदको हारा हुआ और निराश महसूस करते है , और ऐसे समय में हमारा मन गम के सागर में डूब जाता है | वहीँ दूसरी तरफ जब हम कुछ हासिल कर लेते हैं तो हमारा मन ख़ुशी से झूम उठता है | लेकिन कभी आप सबने ये सोचा है की हार और जीत तो केवल हमारा चीज़ों को देखने का नजरिया है , यदि हार के वक़्त भी हम उसमे छुपे हुए सबक और सीख को पहचान लें तो हम उस हार को भी जीत में बदल सकते हैं ।

क्यूंकि जीवन की हर कठिनाई और मुसीबत में ही छुपा होता है उससे लड़ने और उसपर जीत हासिल करने का राज़ । हर मुसीबत और कठिनाई अपने आप में एक मौका होती है अपनी गलतियों को पहचानने और उनसे सीखने का | हर बार जीवन में इंसान हर चीज़ सही नहीं कर पाता जिसके कारन वो मुसीबतों का सामना करता है ऐसे में निराशा में डूब कर हार मान जाने से बेहतर है की मुसीबत की जड़ को पहचाने । गौर करें उन गलतियों और खामियों पर जिनके कारण स्तिथि नियंत्रण से बहार हुई । ऐसा करने से इंसान अपनी खामियों को परखना सीख जाता है और उनसे सबक लेकर एक बेहतर कल और एक बेहतर जीवन की ओर चल पड़ता है । इसीलिए जीवन के हर पड़ाव में यह याद रखना चाहिए की  ज़िन्दगी की मुसीबतें , अपने आप को बदलने का और सीखने का मौका होती है इनसे डरना नहीं बल्कि इनसे सीखना चाहिए और एक बेहतर इंसान बनना चाहिए |

सातवीं सीख : अपने रहस्य किसी को ना बताएं 

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ना कोई डर ना भावनाये ना ही धन , इंसान की सबसे बड़ी दुर्बलता है उसके रहस्य । चाहे कोई कितना भी बड़ा क्यों ना हो कितना भी शक्तिशाली क्यों ना हो आपके रहस्य ही होतें है आपके विनाश की चाबी । इसीलिए अगर आपको हमेशा ही सामर्थ रहना है हमेशा ही सुखी रहना है तो अपने रहस्य किसी को ना बताये । ना अपने करीबी दोस्तों को ना ही आपसे ईर्षा करने वाले शत्रु को क्यूंकि समय आने पर कब कौन शत्रु हो जाये ऐसा कहना संभव नहीं । यदि मुश्किल के समय में आपके अपने ही आपके शत्रु हो जाएँ तो आपकी कामयाबी और आप ही के विनाश के सारे राज़ भी आपके खिलाफ हो जायेंगे ।

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जिस प्रकार रामायण में विभीषण ने रावण के अमृतकुंड का राज़ श्री राम को बताया उसी तरह यदि आपके रहस्य भी आपका विनाश चाहने वाले  किसी व्यक्ति के हाथ लग जाये तो रावण की तरह आपका अंत भी निश्चित है । इसीलिए समझदारी इसी में है की अपने रहस्य अपने तक ही रखे । क्यूंकि आपके रहस्य आपके सुखी जीवन के पतंग की डोर हैं , यदि ये डोर किसी गलत हाथ में पड़ गयी तो आपके सुखी जीवन की पतंग तो मानो डूबी ही डूबी । इसीलिए अपने राज़ अपने मन की तिजोरी में सदा के लिए कैद रखें क्यूंकि इनपर केवल आपका ही हक़ है । आपका ज़रा सा भी कोई राज़ इस तिजोरी से निकला तो मानो आपकी बर्बादी का वक़्त शुरू ।

आठवीं सीख : कामियाबी पाने के लिए नक़ल ना करे 

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हम सब जीवन की परीक्षा में सफल होने और कामियाबी पाने के लिए क्या क्या नहीं करते । हम परिश्रम करते हैं दौड़ भाग करते हैं । लेकिन कभी कभी जब ये सब करने के बाद भी हमारा काम नहीं बनता तो हम कामयाब व्यक्ति की नक़ल करते हैं । ज़रा याद कीजिये अपने बचपन के क्लासरूम को , विद्यालय में जब हम परीक्षा देने जाते थे तो हम ना सही लेकिन कोई ना कोई तोह सफल होने के लिए नक़ल ज़रूर करता था और तो और ऐसा करके सफल भी हो जाता था ।

लेकिन जीवन की परीक्षा ऐसी नहीं होती , यहाँ नक़ल करने वाला सफल नहीं हो पाता , और ऐसा इसलिए है क्यूंकि ज़िन्दगी की परीक्षा हर इंसान के लिए एक अलग प्रश्न पत्र लाती है । हर इंसान का जीवन अलग अलग प्रकार की कठिनाइयों से भरा होता है तो निश्चित रूप से उन कठिनाइयों से निकलने का रास्ता भी अलग ही होगा । इसीलिए यदि आपको जीवन में सफलता पानी है तो अपनी मुश्किलों के उतर खुद ही ढूंढे और सफलता आपकी ही होगी । क्यूंकि नक़ल करने से यदि आप किसी समस्या से निकल भी जाएँ तो उस समस्या से सीख नहीं ले पाएंगे और ऐसा करने पर जब अगली बार आप मुसीबत में होंगे तो ना ही नक़ल काम आएगी और ना ही कोई सीख । इसलिए यदि ज़िन्दगी की परीक्षा का Topper बनना है तो अकेले चलें अकेले सीखे और अकेले बढ़ें , क्यूंकि नक़ल करके असली कमीयाबी कभी हाथ नहीं लगती |

तो ये थी श्रीमद भगवद गीता की 8 सबसे महत्वपूर्ण सीखे । हमे उम्मीद है की आपको हमारी ये वीडियो पसंद आयी होगी और इस वीडियो के ज़रिये आपको भी कुछ ना कुछ सीखने को मिला होगा ।

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हमारे इस वीडियो को देखने के लिए और अपना कीमती समय हमें देने के लिए बोहोत बोहोत शुक्रिया

हम जल्द ही आप सब के लिए एक नयी वीडियो लेकर आएंगे तब तक के लिए आपका दिन शुभ हो