हेलो BOOK LOVERS , आज मैं आपके लिए एक नया वीडियो लेकर आया हूं जो कि Stephen Covey द्वारा लिखी हुई किताब The 7 Habits of Highly Effective People पर आधारित है | इस वीडियो में मैं आपको कामयाब और प्रभावशाली लोगों की सात आदतें बताऊंगा | यह वह अच्छी आदतें हैं जिसकी वजह से लोग दूसरों को प्रभावित कर पाते हैं और कामयाबी हासिल करते हैं | यह आदतें ज्यादातर सभी कामयाब लोगों में होती हैं |
लेखक Stephen Covey कहते हैं कि हम अपनी अनुभूतियों और अनुभवों से दुनिया को देखते हैं | जिस तरह के हमारे अनुभव होते हैं हमें दुनिया वैसी ही नजर आती है | अगर हम परिस्थितियों को बदलना चाहते हैं तो पहले हमें अपने आप को बदलना होगा, और अपने आप को बदलने के लिए हमें अपनी अनुभूतियों को बदलना होगा |
पिछले 200 साल का साहित्य पढ़ने के बाद लेखक ने यह जाना की सफलता की परिभाषा 1920 के बाद काफी बदल गई है | पुराने जमाने में किसी व्यक्ति की सफलता को उसके चरित्र की नैतिकता से देखा जाता था | किसी व्यक्ति की सफलता को उसके चरित्र की विशेषताओं से नापते थे, जैसे की इमानदारी, विनम्रता, सत्य के प्रति निष्ठा, आत्म संयम और साहस | लेकिन सन 1920 के बाद सत्य की परिभाषा बिल्कुल बदल गई | सन 1920 के बाद किसी भी व्यक्ति की सफलता उसके व्यक्तित्व से देखी जाने लगी | जैसे कि उसका व्यक्तित्व, समाज में उसकी छवि, उसका मनोभाव और उसका व्यवहार |
आज के युग में लोग सब कुछ जल्दी चाहते हैं , इसलिए वे सफलता भी जल्दी प्राप्त करना चाहते हैं | जब भी लोग किसी सफल व्यक्ति या उसकी टीम को देखते हैं तो उससे पूछते हैं कि आपने यह सफलता कैसे प्राप्त की मुझे भी बताइए | वह सफल लोगों की तकनीक बहुत जल्दी सीख लेना चाहते हैं, जो की असल में मुमकिन नहीं है | आजकल लोग हर काम को शॉर्ट-कट तरीके से करना चाहते हैं | वह यह नहीं जानते कि सफलता प्राप्त करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है और उसमें लगता है | सफलता के लिए शॉर्टकट जिन्हें हम मेहनत और समय बचाने के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं, इनसे हम केवल छोटी सी सफलता प्राप्त कर सकते हैं लेकिन हम लंबे समय तक सफल नहीं रह सकते |
Stephen Covey कहते हैं कि असल में समस्याएं उतनी बड़ी होती नहीं है जितनी हमें लगती हैं, हमारी समस्याएं हमारे उन्हें देखने के नज़रिए पर निर्भर करती हैं | एक सकारात्मक बदलाव के लिए हमें अपने मनोभावों और व्यवहार को केवल बाहर से नहीं बल्कि अंदर से बदलना होगा |
इस किताब को मैंने 2 PARTS में DEVIDE किया है | ताकि इस किताब में लिखी हुई हर बात आप तक पहुंचा सकूँ | चलिए वीडियो की शुरुआत करते हैं पहले PART के साथ | तो चलिए शुरूआत करते हैं पहली Habit से |
Habit 1 – Be Proactive – हमेशा सक्रिय रहे और तैयार रहें |
आज हम जो कुछ भी है उसके लिए हम खुद ही जिम्मेदार है | हम अपने जीवन की कहानी खुद लिखते हैं | हमें खुद ही सोचना है और यह फैसला लेना है कि हम किस तरह की जिंदगी जीना चाहते हैं | जानवरों और मनुष्यों में यह अंतर है कि मनुष्य अपने चरित्र को परख सकते हैं यह जानने के लिए कि हम अपने आप को और अपने जीवन की परिस्थितियों को किस प्रकार देखते हैं | हम मनुष्यों में अपनी प्रभावशीलता को नियंत्रित करने की काबिलियत है |
प्रभावशाली बनने के लिए यह जरूरी है कि हम हमेशा सतर्क रहें और किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रहें |
जो लोग बिना सोचे समझे जल्दबाजी में किसी भी बात पर प्रतिक्रिया करते हैं उन्हें Reactive कहते हैं | Reactive लोग सोचते हैं कि उनके साथ जीवन में जो कुछ भी हो रहा है अपने आप हो रहा है और उनका उस पर कोई नियंत्रण नहीं है | असफल लोग इस तरह की बातें करते हैं –
मैं कुछ नहीं कर सकता – मैं इसी तरह का आदमी हूं
वह सोचते हैं की समस्या बाहर की दुनिया में है जिस पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है, उनका ऐसा सोचना ही उनकी सबसे बड़ी समस्या है | Reactivity एक बहुत बड़ी समस्या है क्योंकि रिएक्टिव लोगों अपने आपको हमेशा परिस्थितियों का शिकार समझते हैं और उन्हें ऐसा लगता है कि उनका अपनी जिंदगी पर कोई नियंत्रण नहीं है |
दूसरी ओर Proactive यानी सक्रिय लोग समझते हैं कि यह उनकी जिम्मेदारी है कि वह किसी भी परिस्थिति में किस तरह से प्रतिक्रिया करते हैं |
लेखक ने हमें हर व्यक्ति के लिए दो Circle बताए हैं, Circle यानी दायरा | पहला सर्कल है Circle of Concern और दूसरा सर्कल है Circle of Influence | Circle of Concern हमारी चिंताओं का दायरा है और Circle of Influence हमारे प्रभाव का दायरा है, वह प्रभाव जो हम दूसरों पर डालते हैं यi अपने आसपास के माहौल पर डालते हैं |
नकारात्मक लोग इन बातों पर ज्यादा ध्यान देते हैं जो उनकी चिंताओं के दायरे के अंदर हैं | ऐसा करने से उनकी चिंताओं का दायरा बढ़ता है और प्रभाव का दायरा छोटा हो जाता है | वह जल्दी ही विपरीत परिस्थितियों से प्रभावित हो जाते हैं और अपनी समस्याओं के लिए बाहरी परिस्थितियों को दोष देते हैं |
हमारे प्रभाव का दायरा हमारे ही चिंताओं के दायरे के अंदर होता है | प्रोएक्टिव रहने के लिए यानी सक्रिय रहने के लिए हमें अपने प्रभाव के दायरे पर ध्यान देना चाहिए और उसे मजबूत बनाना चाहिए |
दोस्तों अगर इस बात को मैं सरल शब्दों में कहूं तो हमें उन चीजों पर काम करना चाहिए जिनके बारे में हमें लगता है कि हम कुछ कर सकते हैं |
Practice Success Habit 1
दोस्तों अब मैं आपको principle of proactivity को इस्तेमाल करने का तरीका बताऊंगा |
- Start replacing reactive language with proactive language.- रिएक्टिव भाषा की जगह प्रोएक्टिव भाषा का इस्तेमाल करना शुरू करें |
जैसे कि
रिएक्टिव भाषा – वह मुझे परेशान कर देता है |
प्रोएक्टिव भाषा – मैं अपनी भावनाओं को खुद नियंत्रित करता हूं |
- Convert reactive tasks into proactive ones – रिएक्टिव कार्य करने की बजाय प्रोएक्टिव कार्य करें | रिएक्टिव karya वह होते हैं जो हम दूसरे लोगों से यहi विपरीत परिस्थितियों से प्रभावित होकर करते हैं | प्रोएक्टिव कार्य उन्हें कहते हैं जो हम सतर्कता से योजना बनाकर करते हैं, प्रोएक्टिव कार्य करने से हम आने वाली परिस्थितियों के लिए तैयार रहते हैं | प्रोएक्टिव कार्य करने से हम परिस्थितियों से डरते नहीं हैं बल्कि समस्याओं का समाधान करते हैं | हम खुद पर और अपने जीवन पर नियंत्रण रखते हैं |
Habit 2 – Begin With The End In Mind
कोई भी काम शुरु करने से पहले अपने लक्ष्य को ध्यान में रखें | हम अपनी कल्पना से अपने लक्ष्य को अपने मन में देख सकते हैं | हम जो भी बनना चाहते हैं हम अपने आप को वैसे ही अपनी कल्पना में देख सकते हैं | हम में से ज्यादातर लोग अपने आपको काम में व्यस्त रखना आसान समझते हैं | हम धन कमाने के लिए, तरक्की पाने के लिए और अपनी पहचान बनाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं | लेकिन हम कभी अपनी व्यस्त रूटीन से विराम देकर यह सोचने की कोशिश नहीं करते कि हम यह सब किस लिए कर रहे हैं | हम यह नहीं सोचते कि जिन कार्यों के लिए हम कड़ी मेहनत कर रहे हैं क्या वह सच में हमारे लिए महत्वपूर्ण है या नहीं |
हम जो भी करना चाहते हैं हमें उसका अंतिम परिणाम अपने मन में देखना चाहिए | आप किसी भी काम को अपनी मंजिल को ध्यान में रखते हुए शुरू करें | अगर हम काम को शुरू करते हुए अपनी मंजिल को ध्यान में रखेंगे तो निश्चित तौर पर सही दिशा में कदम रखेंगे |
Stephen Covey कहते हैं कि हमारी आत्म जागरूकता हमें अपने जीवन को नियंत्रित करने की शक्ति देती है | जब hummein जागरूकता होती है तो हम अपनी मनपसंद जिंदगी जी सकते हैं बजाय इसके कि हम दूसरों की पसंद का काम करें |
[shop_promo_link]
बिजनेस को भी शुरू करते हुए अंतिम परिणाम को ध्यान में रखना जरूरी है | अंतिम परिणाम का मतलब कि आप अपने बिजनेस से क्या परिणाम चाहते हैं फिर चाहे वह धन के रूप में हो या पहचान के रूप में | एक बिजनेस मैनेजर का काम है उत्पादकता को बनाए रखना लेकिन एक बिजनेस लीडर का काम है यह देखना कि आपके बिजनेस का लक्ष्य क्या है और आप अपने बिजनेस को कौन से मुकाम पर पहुंचाना चाहते हैं |
इससे पहले कि हम अपने लिए ya अपने बिजनेस के लिए कोई लक्ष्य निर्धारित करें हमें यह तय करना होगा कि हमारा महत्व क्या है ya हमारे बिजनेस का मूल्य क्या है | ऐसा करने के लिए कई बार हमें अपनी योजनाओं को दोबारा बनाना पड़ता है ya जो अपनी योजनाओं में कुछ बदलाव करने पड़ते हैं | योजनाओं में बदलाव करने की प्रक्रिया पूरी Rescripting कहते हैं |
Rescripting का मतलब है अपने आदर्शों को बदलना, जो योजनाएं आपने पहले से लिखी हुई है, उनमें से जो अच्छी नहीं है उन्हें ध्यान से पहचानना और अपने लक्ष्य और मूल्यों को ध्यान में रखते हुए दोबारा लिखना | Rescripting हम व्यक्तिगत तौर पर और अपने बिजनेस के लिए कर सकते हैं |
दोस्तों हमारे लिए अपने जीवन के केंद्र को पहचानना भी बहुत जरूरी है क्योंकि जो भी हमारे जीवन का केंद्र होता है वही हमारी सुरक्षा, शिक्षा, बुद्धिमता और ताकत का स्त्रोत होता है | उदाहरण के तौर पर आपका परिवार, आपका जीवनसाथी, आपका धन , आपका काम या आप स्वयं भी अपने जीवन के केंद्र हो सकते हैं | अपने जीवन के केंद्र को ध्यान में रखकर ही हम अपनी रोज की रूटीन के फैसले लेते हैं, काम करते हैं और उसी से प्रोत्साहित भी होते हैं |
Stephen Covey कहते हैं कि हमारे जीवन का केंद्र कोई सिद्धांत होना चाहिए | हमें उन सिद्धांतों की पहचान होनी चाहिए जो समय के साथ नहीं बदलते | हमें उन सिद्धांतों को अपने जीवन का सिद्धांत बनाना चाहिए | ऐसे सिद्धांत हमें जीवन में सही रास्ता दिखाते हैं जिस पर चलकर हम अपने व्यवहार को अपनी सोच और अपने मूल्यों से मिला सकेंगे |
Practice Success Habit 2 – दोस्तों अब मैं आपको बताऊंगा कि आप दूसरी हैबिट को किस तरह से अमल में ला सकते हैं |
- आप इस बात की कल्पना करें कि आपकी मृत्यु के बाद लोग आपके बारे में क्या सोचेंगे ? आपके परिवार के सदस्य, आपके करीबी रिश्तेदार और आपके दोस्त आपके बारे में क्या बात करेंगे ? यह लोग इस बारे में जरूर बात करेंगे कि आपने किस तरह से अपनी जिंदगी को जिया | वह yeh भी कहेंगे की उनके साथ आपका रिश्ता कैसा था | अब ज़रा सोचिए कि आप अपनी मृत्यु के बाद उनके मुंह से क्या कहलवाना चाहते हैं | आप सोचिए कि आप के पास जीवित रहने के लिए केवल 30 दिन है | अपनी प्राथमिकताओं को निर्धारित करें और 30 दिन के अंदर उन प्राथमिकताओं पर जीने का अभ्यास करें |
- अपनी भूमिकाओं को अलग अलग एक काग़ज़ पर नोट करें – आपकी व्यक्तिगत भूमिका, आपके काम की भूमिका और आप की सामाजिक भूमिका – इन सभी भूमिकाओं के लिए 3 से 5 लक्ष्य निर्धारित करें और उन सब लक्ष्यों को भी काग़ज़ पर नोट करें |
- आपको किस बात से डर लगता है? क्या आपको पब्लिक के सामने बोलने से डर लगता है? किसी काम को करने के बाद लोगों की प्रतिक्रिया से डर लगता है ? कुछ नया करने के लिए अपने परिवार वालों से डर लगता है? क्या आप समाज से डरते हैं? अपने जीवन के सबसे बड़े डर को पहचानिए और अब अपने मन में उस परिस्थिति को देखिए जब वह डर बिल्कुल आप के सामने हो | अब मन ही मन में देखें कि आप उस डर से कैसे निपटेंगे | अपने जीवन के सबसे बड़े डर से और उस परिस्थिति से निपटने के तरीकों को bhi भी कागज पर नोट करें |
दोस्तों दूसरी Habit आप को सिखाती है कि किस तरह से आपको अपने जीवन के ya अपने बिजनेस के लक्ष्य को योजना बनाने से पहले ही अपने ध्यान में रखना चाहिए | लक्ष्य को ya अंतिम परिणाम को ध्यान में रखना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ऐसा करना आपको सही दिशा में ले जाता है, आप लक्ष्य के हिसाब से बिल्कुल सही कार्य करते हैं और अपने कार्य क्षेत्र में सफलता प्राप्त करते हैं | ऐसा करने से आप केवल अपने लक्ष्य को यहां परिणाम को प्राप्त ही नहीं करते बल्कि व्यक्तिगत तौर पर पहले से अधिक प्रभावशाली बन जाते हैं | आप अंतिम परिणाम को अपने मन में देखने की कला को सीख लेते हैं और इस कला की शक्ति को भी समझ जाते हैं |
Habit 3 – Put First Things First (जरूरी कार्यों को प्राथमिकता दें)
हमें हमेशा पहले वह कार्य करने चाहिए जिन्हें करना जरूरी है ना कि वह जिन्हें इस समय करना आवश्यक है | हमें अपने डेली रूटीन के कार्य भी इस तरह करने चाहिए | फ्रेंड्स Habit 2 मैं मैंने आपको अपने मूल्यों को और अपने लक्ष्य को पहचानने का महत्व बताया है | Habit 3 में मैं आपको बताऊंगा कि अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आपको क्या करना चाहिए और किन कार्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए |
अपने अनुशासन को बनाए रखने के लिए और अपना ध्यान अपने लक्ष्य पर केंद्रित रखने के लिए हमें उस समय भी काम करने की इच्छा शक्ति रखनी होगी जब हम उसे नहीं करना चाहते | हमें अपने मूल्यों के हिसाब से काम करना होगा ना कि अपनी इच्छाओं के हिसाब से |
आपके सभी कार्यों को दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता है – Urgent और Important, Urgent कार्य वह होते हैं जिन्हें अभी करना अनिवार्य होता है और Important काम वह होते हैं जिन्हें करना जरूरी होता है | दोस्तों अगर आप इस टाइम मैनेजमेंट के टेबल को ध्यान से देखिए जिसमें 4 Quadrant है |
ज्यादातर हम urgent यानी अभी करने वाले कामों को प्राथमिकता देते हैं | हम अपना समय उन कामों को करने में बर्बाद करते हैं जिन्हें करना जरूरी नहीं होता | इसका मतलब है कि हम दूसरे Quadrant को नजरअंदाज कर रहे हैं जो कि सबसे महत्वपूर्ण है |
अगर हम पहले Quadrant पर ध्यान देते हैं और अपना समय अपने संकट और समस्याओं को सुलझाने में लगाते हैं तो हमारी समस्याएं और भी बड़ी हो जाती हैं | ऐसा करने से हमारे जीवन में तनाव और भी बढ़ जाता है |
अगर हम तीसरे Quadrant पर अधिक ध्यान देते हैं तो हम अपना ज्यादातर समय उन कार्यों में बिता देते हैं जो हमें अनिवार्य लगते हैं | जबकि असल में जो कार्य हमें अनिवार्य लगते हैं वह हमारी नहीं बल्कि दूसरे लोगों की उम्मीदों और प्राथमिकताओं पर निर्भर करते हैं | हमारा ध्यान किसी भी काम में ज्यादा देर तक नहीं लगता, हमारा खुद पर कोई नियंत्रण नहीं रहता और हमारे रिश्ते भी खराब हो जाते हैं |
अगर हम चौथे Quadrant पर अधिक ध्यान देते हैं तो हम एक गैर जिम्मेदार जिंदगी जीते हैं | ऐसे लोग काम में ज्यादा व्यस्त रहते हैं, समय भी ज्यादा बर्बाद करते हैं, ऐसे लोग दूसरों पर अत्यधिक निर्भर होते हैं और कई बार तो नौकरियों से भी निकाल दिए जाते हैं |
दूसरा Quadrant किसी के भी व्यक्तिगत प्रबंधन के लिए सबसे उत्तम है | यह लंबे समय की योजनाएं बनाने, रिश्ते बनाने और तैयारी करने में काम आता है | यह सब ऐसे काम है जो हमें पता है कि हमें करने हैं लेकिन हम उनहे समय पर नहीं करते क्योंकि वह हमें अनिवार्य aur आवश्यक नहीं लगते |
दूसरे Quadrant पर ध्यान देने के लिए हमें अपने कार्यों की प्राथमिकता को बदलना पड़ेगा | हमें दूसरे कार्यों को ना कहना होगा चाहे वह हमें अनिवार्य लग रहे हो | जब हम दूसरे Quadrant पर ध्यान देते हैं तो इसका मतलब है कि हम लंबे समय के लिए सोच रहे हैं हम कार्यों को शुरू से करते हैं और समस्याओं को उनके आने से पहले ही रोक देते हैं | ऐसा करने से हम Pareto Principle को अमल मैं लाते हैं | Pareto Principle कहता है कि हमें अपने 80% परिणाम 20% समय मैं किए हुए कार्यों से मिलते हैं |
हमें अपना ज्यादा ध्यान अपने रिश्ते और कार्यों के परिणामों पर लगाना चाहिए और उसके बाद समय पर ध्यान देना चाहिए |
Practice Success Habit 3
अब मैं आपको Habit 3 को विकसित करने के कुछ तरीके बताऊंगा |
- दूसरे Quadrant की एक ऐसी गतिविधि को पहचाने जिसे आप बहुत समय से नजरअंदाज कर रहे थे | इस गतिविधि को एक डायरी में नोट करें और उसे अमल में लाने की अपने आपसे कमिटमेंट करें |
- कार्यों को प्राथमिकता देने के लिए एक डायरी में आप खुद अपना समय प्रबंधन का एक मैट्रिक्स बनाएं |
- समय प्रबंधन का मैट्रिक्स बनाने के बाद यह देखें कि आप किस Quadrant में कितना समय लगाएंगे | उसके बाद 3 दिन तक अपने कार्यों को करने का समय नोट करें और फिर देखें कि आप का अंदाजा कितना सही था | सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपने दूसरे Quadrant में कितना समय लगाया |
Habit 4 – Think Win Win
प्रभावशाली और स्वतंत्र रिश्ते बनाने के लिए हमें वह परिस्थितियां बनानी चाहिए जिनमें सभी का फायदा हो | ऐसी परिस्थितियों को Win-Win situations कहते हैं और Win-Win situations हर पार्टी के लिए फायदेमंद होती हैं | लेखक Stephen Covey कहते हैं कि इंसान के रिश्ते छह प्रकार के होते हैं | चलिए मैं आपको एक एक करके 6 रिश्तो के बारे में बताता हूं |
- Win-Win – इसमें दोनों लोग जीतते हैं | किसी भी प्रकार का समझौता ya से समाधान दोनों लोगों के लिए फायदेमंद होता है | ऐसे रिश्ते में दोनों व्यक्ति संतुष्ट रहते हैं क्योंकि वह जो भी काम करते हैं उसमें दोनों का फायदा देखकर करते हैं | यह लोग ऐसा कोई काम नहीं करते जिसमें दोनों में से किसी एक का भी नुकसान हो |
- Win-Lose : ऐसे रिश्ते में एक व्यक्ति के जीतने से दूसरा व्यक्ति हारता हैं | इस प्रकार के व्यक्ति किसी भी काम को करवाने के लिए अपनी पोजीशन और ताकत का इस्तेमाल करते है | इसमें केवल जीतने वाले का फायदा होता है और हारने वाले व्यक्ति का नुकसान होता है |
- Lose-Win : ऐसे रिश्ते में एक व्यक्ति के हारने से दूसरा व्यक्ति जीतता है | ऐसे लोग हमेशा दूसरों को खुश करने को तैयार रहते हैं, और लोगों में अपनी लोकप्रियता बना कर ताकत जुटाते हैं |
- Lose-Lose : ऐसे रिश्ते में दोनों लोग हार जाते हैं | इस प्रकार के व्यक्ति अड़ियल किस्म के और घमंडी होते हैं | अपने घमंड की वजह से वह छोटी-छोटी बातों पर एक दूसरे से झगड़ा करते हैं | जब भी ऐसे दो लोग आपस में मिलते हैं तो दोनों का नुकसान होता है | यह लोग कोई ना कोई ऐसा काम ज़रुर करते हैं जिससे दोनों का नुकसान हो |
- Win: ऐसे लोग जीतने की सोच रखते हैं और उसके लिए वह किसी और को हराना नहीं चाहते क्योंकि उनको किसी और के जीतने हारने से कोई मतलब नहीं होता | उन्हें जो भी करना होता है वह केवल उसी काम पर ध्यान देते हैं और उस कार्य को सफलतापूर्वक करते हैं |
- Win-Win or No Deal: यह लोग Win-Win श्रेणी के ही होते हैं लेकिन वह कोई ऐसा काम नहीं करते जिसमें दोनों पार्टियों को फायदा ना हो | वह कोई ऐसा काम नहीं करते जिसमें दोनों में से किसी एक व्यक्ति का भी नुकसान हो |
[shop_promo_link]
The best option is to create Win-Win situations
हमारे लिए सबसे अच्छा विकल्प है कि हम Win-Win situations यानी दोनों पार्टियों के फायदे वाली परिस्थितियां बनाएं, क्योंकि Win-Lose या Lose-Win, वाली परिस्थितियों में केवल एक पार्टी को फायदा होता है वह भी कुछ समय के लिए लेकिन उसके परिणाम दोनों पार्टियों के बीच के रिश्ते पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं | दोनों ही परिस्थितियों में जब तक एक पार्टी का नुकसान ना हो तब तक दूसरी पार्टी को फायदा नहीं हो सकता |
The Win-Win or No Deal option is important to use as a backup
हमें Win-Win or No Deal को एक विकल्प की तरह इस्तेमाल करना चाहिए | Win-Win or No Deal मैं हमें किसी से भी धोखा करने या हेराफेरी करने की जरूरत नहीं होती बल्कि हम खुलकर अपनी और दूसरों की समस्याओं को समझने की कोशिश करते हैं |
To go for Win-Win, you not only have to be nice, you have to be courageous.” -Stephen Covey”
Win-Win situations में हम दो बातों का ध्यान रखते हैं -Consideration and courage यानी विचार और साहस |
Win-Win situations में दूसरा महत्वपूर्ण घटक है Abundance Mentality यानी प्रचुरता वाली मानसिकता को बनाए रखना | Abundance Mentality का मतलब है कि दुनिया में सभी लोगों के लिए हर चीज प्रचुरता में है | ज्यादातर लोग Scarcity Mentality यानी अभाव की मानसिकता से काम करते हैं | वह इस तरह सोचते हैं कि अगर आपको कुछ मिलेगा तो उन्हें कुछ नहीं मिलेगा | इस तरह के लोग अपनी पहचान और अपने काम के क्रेडिट को कभी दूसरों से शेयर नहीं करते और वह दूसरों की सफलता को देखकर कभी खुश नहीं होते |
जीवन में जितना हमारा चरित्र अच्छा होगा उतना ही हम सक्रिय रहेंगे | जितना हम Win-Win के प्रति प्रतिबद्ध रहेंगे हम उतने ही प्रभावशाली बने रहेंगे | Win-Win बने रहने के लिए हमें परिणामों पर ध्यान देना चाहिए, ना काम करने के तरीकों पर, ना समस्याओं पर और ना ही लोगों पर |
Win वाली मानसिकता को प्रतिस्पर्धा के इस वातावरण में बनाए रखना बहुत कठिन है | इस मानसिकता को बनाए रखने के लिए हमें एक संस्था के तौर पर अपनी पुरस्कार प्रणाली को अपने लक्ष्यों और मूल्यों के साथ मिलाना होगा |
Practice Success Habit 4
फ्रेंड्स अब मैं आपको Win वाली मानसिकता विकसित करने के कुछ तरीके बताऊंगा |
- आप किसी ऐसी परिस्थिति के बारे में सोचिए जिसका समाधान आप ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं | आप उन सभी चीजों की लिस्ट बनाएं जो दूसरा व्यक्ति चाहता है | उसके बाद उन चीजों के सामने उन तरीकों के बारे में लिखें जिनका इस्तेमाल करके आप वह सभी चीजें उस व्यक्ति के लिए हासिल करेंगे |
- आप अपने जीवन के तीन सबसे अधिक महत्वपूर्ण रिश्तो के बारे में सोचिए | उसके बाद आप यह देखें कि आपके इन रिश्तो में कितना संतुलन है | एक रिश्ते में आप जितना दूसरे व्यक्ति को देते हैं क्या उतना आपको मिलता है ? क्या किसी रिश्ते में आप देने से ज्यादा लेते हैं ? अगर ऐसा है तो आपके रिश्ते में पर्याप्त संतुलन की कमी है | अब आप ऐसे 10 तरीके लिखें जिनसे आप दूसरे व्यक्ति से कुछ भी लेने से अधिक उसको दे सकते हैं |
- आप अपने बातचीत करने की प्रवृत्ति के बारे में ध्यान से सोचे | क्या वह Win-Lose की श्रेणी में आती है ? इस बात पर विचार करें कि आपकी बातचीत करने की प्रवृत्ति दूसरों के साथ आपके मेल जोल को कैसे प्रभावित करती है ? क्या आपकी प्रवृत्ति आपके रिश्ते को बेहतर बनाने में आपकी सहायक है या नहीं ? इन सभी बातों को एक डायरी में लिखकर नोट करें |
फ्रेंड्स Habit 3 में मैंने आपको बताया कि आपको अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए किस तरह जरूरी कार्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए और Habit 4 में मैंने आपको बताया कि आपको Win-Win situations कैसे बनानी चाहिए जिनमें सब का फायदा हो | तो दोस्तों इसी के साथ हमारा है वीडियो समाप्त होता है और अपने अगले वीडियो में मैं आपको पांचवी छठी और सातवीं Habit के बारे में विस्तार से बताऊंगा |
इसी के साथ हमारा यह वीडियो समाप्त होता है | मुझे उम्मीद है कि आपको यह वीडियो पसंद आया होगा और आपने इस वीडियो में बताई गई बातों से बहुत कुछ सीखा होगा | हमारे इस वीडियो को लाइक और शेयर करें और हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें | हमारे इस वीडियो को देखने के लिए और अपना कीमती समय हमें देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद |
मैं जल्द ही आपके लिए- The 7 Habits of Highly Effective people के 2nd पार्ट पर वीडियो लेकर आऊंगा तो चलिए मिलते हैं अगले वीडियो में तब तक के लिए आपका समय शुभ हो |



