Hello मुझे पूरी उम्मीद है की Sun Tzu द्वारा लिखित बुक द आर्ट ऑफ वॉर का पहला part आपको बहुत पसंद आया होगा जिस में मैंने आपको बताया कि ये किताब सिर्फ युद्ध के मैदान में ही नहीं बल्कि दैनिक जीवन के युद्ध जीतने में भी बहुत सहायक है | इस किताब को सुनने के बाद आप यकीनन अपने अंदर साहस और ऊर्जा का अनुभव करेंगे | Sun Tzu की ये किताब हमें युद्ध के मैदान में युद्ध कला सिखातीं है कि , किस तरह अलग अलग परिस्थितियों में कुछ बातें याद रख के आप सामने वाले को हरा सकते है और इस किताब के द्वारा आप जीवन की विभिन्न परिस्थितियों में जीतने के तरीकों के बारे में जान सकते हैं | इस वीडियो के पहले part में मैंने आपको इस बुक के पहले 6 चैप्टर के बारे में बताया था और मुझे पूरी उम्मीद है कि आपको वह वीडियो बहुत पसंद आया होगा और अगर आपने वह वीडियो अभी तक नहीं देखा तो आप डिस्क्रिप्शन में दिए हुए लिंक पर जाकर या ऊपर आई बटन पर क्लिक करके उस Part को देख सकते हैं इस वीडियो में मैं आपको इस बुक के बाकी बचे हुए चैप्टर के बारे में डिटेल में बताऊंगा तो चलिए शुरुआत करते हैं सातवें चैप्टर से-
7.MANEUVERING (छद्म युद्ध)
Sun Tzu लिखते है की युद्ध में सेना नायक अपनी शक्ति अपने राज्य से ग्रहण करता है ठीक उसी तरह हम अपनी शक्ति अपने और परिवार से प्राप्त करते है , क्यों की वही है जो हमारे अंदर हौसला भर सकते है | Sun Tzu के अनुसार सेना नायक को हमेशा अपनी सेना को इकट्ठा करके उसकी ताकत को भी एक कर लेना चाहिए और फिर छद्म युद्ध यानी धोखे से युद्ध कि तैयारी करनी चाहिए | इसी तरह आप सब भी पहले उपयोग में आने वाले सभी संसाधनों को इकठ्ठा कर लें और तभी किसी भी काम की तैयारी करें जिससे कुछ भी संभव हो सकता है | Sun Tzu लिखते है की एक राजा को युद्ध जीतने के लिए शत्रु को मुर्ख बनाना आना चाहिए और फिर किसी भी तरह युद्ध स्थल तक शत्रु से पहले पहुँच जाना ही सबसे अच्छी नीति होती है | लेकिन अगर छद्म युद्ध करते वक़्त थोड़ी भी लापरवाही हुई तो राजा खुद ही खतरे में पड़ सकता है | इसी तरह अगर आप किसी चीज की तैयारी में अपनी किसी चालाकी का उपयोग कर रहे है , तो ध्यान रखें कि आप किसी भी तरह कि परेशानी में न पड़ जाएं | अगर आप जरुरत से ज्यादा काम करेंगे तो अपना समय बर्बाद करेंगे और अगर जरुरत से कम काम करेंगे तो तैयारी पूरी नहीं होगी| इसलिए कोशिश कीजिये की पहले ही एक टाइम टेबल बना लें की क्या करना है और क्या नहीं |
आप अगर लगातार कुछ दिन ज्यादा मेहनत करें और ये सोचें कि काम पूरा होने पर कुछ करना ही नहीं पड़ेगा तो आप गलत है | इसलिए अपने किसी भी काम में नियम ज़रूर बनाएं | एक साथ सारा काम करने से अच्छा है की थोड़ा थोड़ा काम हर रोज किया जाये |
Sun Tzu लिखते है की जब तक हम शत्रु की हर चाल से पूरी तरह परिचित न हो हम अपनी सेना को कोई आदेश नहीं दे सकते ठीक उसी तरह अगर आप किसी परीक्षा के Pattern को और Syllabus को पूरी तरह नहीं समझते तो उस परीक्षा में आपके सफल होने के चांस बहुत कम हो जाते है |जिस तरह राजा को अपनी सभी योजनाओं को गुप्त रखना चाहिए उसी तरह आप सब को भी अपनी सारी रूप रेखा को गुप्त रखना चाहिए जब तक आप सफल न हो जाएं |
Sun Tzu कहते है बहुत सोचने समझने के बाद ही युद्ध के लिए आगे बढ़ना चाहिए , ठीक इसी तरह किसी भी काम को करने से पहले उसके परिणामों को सोच कर ही आप आगे बढे | Sun Tzu लिखते है कि अगर सेना नायक थक जाता है तो पूरी सेना का उत्साह कम हो जाता है इसी प्रकार आप अपने सेना नायक खुद ही है इसलिए उत्साह को कभी कम मत होने दीजिये|
8.VARIATION IN TACTICS(युक्तियों में विविधता)
Sun Tzu लिखते है की कोई भी राजा उस जगह अपनी किसी भी युक्ति का प्रयोग नहीं करता जहाँ उसे हारने की संभावना नजर आती है ठीक इसी तरह अगर आपको पता हो की आप हार जायेंगे तो वहां अपनी किसी भी नए Idea का प्रयोग न करे | इससे दो नुक्सान है पहला ये कि आपका आईडिया दूसरों को पता पड़ जायेगा और दूसरा ये कि आप जीत भी हासिल नहीं कर पाएंगे | जो सेना नायक ये जानता है की युक्ति को बदल कर उपयोग में लाने से किस तरह अपनी सेना को नियंत्रण में रखा जाता है वहां जीत की सम्भावना अधिक होती है| ठीक ऐसे ही में आपसे कहना चाहता हूँ की सारे काम एक ही तरीके से नहीं होते हर काम को करने का तरीका अलग अलग होता है | ठीक वैसा ही जैसे गणित का एक सवाल कई तरीकों से हल किया जा सकता है और परीक्षा में पास होने के लिए हमें एक से ज्यादा तरीके तो आने ही चाहिए | आपको हमेशा अपने फायदे और नुक्सान को पहले सोच लेना चाहिए , ताकि सिर्फ फायदों की ओर ही कदम बढ़ाये जा सकें| वैसे भी हम सब बस वही करना चाहते है जिसमे हमारा फायदा हो | Sun Tzu कहते है की युद्ध की कला हमें ये सिखाती है किसी पर भी आँख बंद करके विश्वास नहीं करना चाहिए | Sun Tzu ने 5 ख़तरनाक गलतियां बताई है जो की सेना नायक को हरा सकती है |
1)लापरवाही जो तोड़ फोड़ का कारण बनती है|
2)कायरता जो कब्ज़े का कारण बनती है |
3)गुस्सा जो की अपमान से जाग उठता है लेकिन यही हार का कारण बनता हैं|
4)किसी का अधिक सम्मान करना भी आपको कुछ करने नहीं देता और ये भी हार का एक कारण है|
5)अपनी सेना का हद से ज्यादा ख़याल रखना जो चिंता और परेशानी का कारण बनती है |
इसी तरह किसी पर जरुरत से ज्यादा विश्वास करना , तनाव और चिंता को अपने ऊपर हावी होने देना ,आसानी से गुस्सा करना ये सब कारण हमें हमारे लक्ष्य से दूर कर सकते है तो आप इन्हे अपने आप से दूर रखिये |
9.THE ARMY ON THE MARCH(सेना परायण )
Sun Tzu कहते है की जब भी सेना के रुकने कि जगह सेना नायक को तय करनी हो तो समझदारी दिखाते हुए पहाड़ों को जल्दी पार कर लेना चाहिए और घाटियों के निकट रुकना चाहिए | ताकि मुसीबत आने पर घाटियों में छिपा जा सके | ठीक ऐसे ही आपको अपने कठिन कामों को पहले पूरा करने कि कोशिश करनी चाहिए ताकि अगर वक़्त कम हो तो आपको सभी चीजों के बारे में थोड़ी थोड़ी जानकारी हो |
Sun Tzu लिखते है कि सेना को नदी को पार करने के बाद उससे दूर हो जाना चाहिए और अगर आपका विरोधी आपके पास नदी के रास्ते से आ रहा है तो उसे नदी पूरी पार कर लेने देना चाहिए | बीच नदी में जोश के कारण जाकर नहीं लड़ना चाहिए | इसी तरह आपको भी अधूरी तैयारी से जीवन कि किसी भी परीक्षा में नहीं बैठना चाहिए और आप सब ने सुना भी होगा कि अधूरा ज्ञान पुरे अज्ञान से ज्यादा ख़तरनाक होता है |
अगर रास्ते में कोई दल दल आ जाये तो बिना देरी किये उसे जल्दी पार कर लेना ही सबसे अच्छा होता है | ऐसे ही आपसे जलने वाले लोग , पहले कि असफलताएं ,आपके पडोसी जो बिलकुल नहीं चाहते कि आप सफल हो आपके रास्ते के दलदल है | इसलिए इन सभी की बातों को अनसुना कर दें और पिछली सभी बातो को भूल कर आगे बढ़ने की कोशिश करें |
Sun Tzu लिखते है कि सभी सेनाएँ रौशनी वाले ऊँचे स्थानों को पसंद करती है इसलिए राजा को ऐसी ही व्यवस्था करनी चाहिए | अगर पक्षी आसमान में बहुत ऊंचाई तक उड़ रहे है तो ये समझ जाना चाहिए की विरोधी कभी भी अचानक हमला करने वाला है| ऐसे ही अगर कोई ऐसा इंसान जो आपसे जलता हो और अचानक आपकी तारीफ करना शुर कर दे तो समझ जाइये कि, या तो वो आपके साथ कुछ गलत करने वाला है या उसे आपसे कुछ काम है जो सिर्फ आप ही कर सकते है | इसलिए आपकी चापलूसी कर रहा है | इसी तरह Sun TZu लिखते है कि अगर आपका विरोधी आपसे प्यार से बात करे तो समझिये की वो युद्ध करने के लिए तैयार है और उसे अपने ऊपर पूरा विश्वास है कि वो युद्ध जीत लेगा | ठीक इस तरह अगर आपका विरोधी आपको गुस्सा दिलाये और उकसाये तो समझिये की अभी उसकी तैयारी पूरी नहीं है और वो ये चाहता है कि आप गुस्से में कुछ ऐसा कर दें कि उसके लिए बिना तैयारी के भी युद्ध जीतना भी आसान हो जाये | युद्ध के मैदान में अगर सेना नायक को सैनिको के कंधे झुके हुए दिखें तो समझना चाहिए की उन्हें भोजन की आवश्यकता है | अगर किसी राजा ने किसी सैनिक को पानी लेने के लिए भेजा और वो सैनिक खुद पानी पीने लगे तो समझना चाहिए की सेना प्यासी है| हमेशा एक राजा को अपनी सेना की देखभाल अपने लोगो की तरह ही करनी चाहिए उनकी जरूरतों को समझना चाहिए और पूरा करना चाहिए |इसी तरह आपको भी आपके रास्ते में आने वाली सभी जरूरतों को समझना चाहिए और उन्हें पूरा करने कि कोशिश करनी चाहिए |
10.TERRAIN(भू भाग)
Sun Tzu कहते है की युद्ध के मैदान 6 तरह के होते है…
1)अभिगम्य मैदान– जहाँ दोनों दलों की पहुँच आसानी से हो लेकिन हमेशा सेनानायक को इस तरह के मैदानों में अपने विरोधी से पहले पहुँच जाना चाहिए और सभी व्यवस्थाएं कर लेनी चाहिए ठीक इसी तरह जीवन के हर क्षेत्र में आपको आगे से बढ़ कर काम करने कि आदत होनी चाहिए ताकि आपकी बात पहले सुनी जाए |
2)फंसने वाले मैदान– ऐसा मैदान जो पहले युद्ध करके सभी राजाओं द्वारा त्याग दिया गया हो और फिर से उस पर युद्ध कर के जीतना कठिन हो लेकिन अगर आपको पता हो की आपका विरोधी कमजोर है तो आप ऐसे मैदान में जीत सकते है | ठीक ऐसे ही अगर किसी काम को करके आप पहले कभी हार चुके है तो एक बार फिर से कोशिश ज़रूर करनी चाहिए क्या पता इस बार आप जीत जाएं | लेकिन ये तो तभी पता पड़ेगा जब आप कोशिश करके देखेंगे |
3)अवसरवादी मैदान– ऐसे मैदान जिसमे कोई भी पक्ष लाभ न ले सके और शत्रु आपको अलग अलग तरीके से लुभाने की कोशिश करे उस में आगे नहीं बढ़ना चाहिए जब तक शत्रु की सभी योजनाएं आपको पता न हो |
4)संकरे रास्ते– मतलब आप पहले से इन छोटे रास्तों पर जाकर उन्हें पूरी तरह घेर लें और शत्रु के आने का इंतज़ार करे लेकिन अगर शत्रु पहले पहुँच गया है और अगर उसने मजबूत घेरा डाल के रखा है तो आगे न बढे |
5)प्रपाती ऊंचाई— मतलब अगर शत्रु ने पहले ही पहाड़ो पर और ऊँची जगहों पर कब्ज़ा कर लिया है तो आगे न बढे बल्कि शत्रु को लालच दे की वो नीचे उतर आये| इसी तरह आपको भी किसी तरह के लालच में नहीं फंसना चाहिए जैसे कि आजकल कई प्रकार के Fake Calls आते है जो कहते है कि आप इतना पैसा जमा करवा दीजिये आपका नाम लकी ड्रा में खुला है या इस बैंक कि तरफ से आपका नया कार्ड दिया जा रहा है | और भी ऐसे बहुत सी लुभावनी बातें होती है जिनमे कई लोग आ जाते है और अपने पैसे बर्बाद कर देते है तो कोशिश करें कि आप भी इनसे बचें और दूसरो को भी इस बारे में बताएं |
6)ऐसी स्थितियां जो शत्रु की पहुँच से दूर हो– मतलब अगर दोनों सेनाओ की ताकत बराबर है तो आपको लड़ना नहीं चाहिए क्यों की इसमें आपका ही नुकसान है|
इसके बाद Sun Tzu ने वो परिस्थितियां बताई है जिसके लिए राजा अपनी हार के लिए खुद जिम्मेदार होता है |
1)भाग जाना- यदि सेना अपने से 10 गुना ज्यादा बड़ी सेना से लड़ रही तो तो भाग जाएगी इसलिए राजा को ये ध्यान रखना चाहिए कि सेना कितनी बड़ी है |
2)आदेश का पालन न करना- यदि सैनिक मजबूत है और अधिकारी कमजोर तो सैनिक राजा की बात नहीं मानेंगे |
3)पतन यानी हार जाना या मर जाना- जब अधिकारी मजबूत हो और सैनिक कमजोर हों ,
जब उच्च अधिकारी गुस्से में हो , और बिना ये जाने की वो लड़ने की स्थिति में हैं या है विरोधी से लड़ने लगे तो नष्ट होना निश्चित है |
4)सभी संसाधनों का नष्ट हो जाना|
5)अव्यवस्था — जब सेना नायक कमजोर हो और उसके आदेशों का पालन न हो रहा हो तो ये अव्यवस्था होती है| इसी तरह हमें भी अपने जीवन के सभी काम व्यवस्था के अंदर ही करने चाहिए |
६)भगदड़- जब राजा शत्रु की ताकत का अंदाजा न लगा सके और कमजोर सैनिक लड़ने के लिए भेज दे तो वहां सैनिक अपनी जान बचने के लिया व्याकुल हो कर भगदड़ मचा सकते है | जो लड़ाई में अपने ज्ञान का प्रयोग करता है वही लड़ाई जीतता है इसलिए आपके अंदर जितनी भी छमताएँ है सभी अपने लक्ष्य कि प्राप्ति में लगा दीजिये |अगर आप कुछ करना चाहते है तो ज़रूर कीजिये चाहे कितने भी लोग मना करें और अगर आप कुछ करना नहीं चाहते तो बिलकुल मत कीजिये चाहे कुछ भी हो जाये| सिर्फ वही कीजिये जो करने का आपका मन है क्यों अपने मन के काम में आप अपना 100% दे सकते है
11.THE NINE SITUATIONS(नौ स्थितियां)
Sun Tzu लिखते है की युद्ध कला 9 प्रकार के मैदानों में पहचानी जा सकती है…
1)विस्तृत मैदान– जहाँ राजा अपने क्षेत्र में खुद लड़ रहा हो जैसे हम सब को भी अपनी लड़ाई खुद लड़नी चाहिए ताकि परिणाम कैसा भी हो उसके जिम्मेदार हम खुद हों |
2)सुगम मैदान -जब राजा शत्रु की सीमा में प्रवेश कर चुका हो| जैसे कि अगर कोई आपको हराना चाहता है तो उसकी तैयारी पूरी हो चुकी हो |
3)विवादपूर्ण मैदान-जहाँ किसी भी पक्ष को लाभ पहुँच सकता है| जैसे कि किसी के साथ आपका मुकाबला हो रहा हो और जीत दोनों में से किसी कि भी हो सकती है |
4)खुला मैदान– जहाँ किसी भी पक्ष को लड़ने की स्वंत्रता होती है ठीक वैसे ही जैसे किसी परीक्षा में हमरे साथ और भी लाखो लोग परीक्षा देते है |
5)राजमार्गो का मैदान– जहाँ कई राज्यों की सीमाएं मिलती हो |
6)गंभीर मैदान –जब शत्रु राज्य में सभी किलेबन्दियो को तोड़ते हुए घुस जाये ठीक वैसे ही जैसे आपने किसी को रोक कर रखने कि पूरी तैयारी की हो लेकिन आपकी सारी तैयारी ख़तम करके आपका दुश्मन आपके पास तक आ ही जाए |
7)कठिन मैदान– जहाँ पहाड़, नदी , दलदल हो मतलब उबड़ खाबड़ रास्ता लेकिन रास्ता कैसा भी हो चाहे कितना भी कठिन हो आप चलते रहिएगा | क्यों की सभी मुसीबतों को पार करके जो सफलता मिलती है उसका तो मज़ा ही अलग होता है |
8)घिरा हुआ मैदान– जहाँ पहले से ही शत्रु उपस्थित हो लेकिन फिर भी आप छुपे हुए रास्तों से पहुंच जाएँ ये ऐसा ही है जैसे आपके किसी दुश्मन ने आपको हारने की बहुत कोशिशें की लेकिन आप सफल हो ही गए |
9)निशानोन्मत मैदान– जहाँ देर किये बिना लड़ सके और अपने आप को नष्ट होने से बचा सकें| दुश्मन तभी कदम आगे बढ़ता है जब उसे पता हो की वो जीत सकता है | युद्ध के लिए चतुराई जरूरी है | जैसे जीवन की सभी परीक्षाओं को पास करने के लिए आपकी मेहनत ज़रूरी है | अपने आप को निरंतर सक्रिय बनाये रखें| अपने आप को ऐसा बनाएं की चाहें बात मरने और जीने तक आ जाए तो भी आपके मन में भागने का विचार न आये | हमेशा अपनी मज़बूती और कमजोरियों के बीच तालमेल बिठाये | जिस तरह किसी भी युद्ध को जीतने के लिए पहली शुरुआत खुद राजा को ही करनी होती है , उसी तरह सफलता पाने की शुरुआत आपको ही करनी होगी| क्यों की जीवन आपका है उसके सारे फैसले आपके है| और भविष्य भी आपके ही हाथो में है | आप चाहे तो इसे सोना बना लें और चाहें तो मिट्टी |
12.THE ATTACK BY FIRE(आग से आक्रमण)
Sun Tzu ने शत्रु को आग से ख़तम करने के 5 तरीके बताये है…
1)शत्रु सैनिको को रुकने वाले स्थान पर ही मार देना
2)शत्रु के भण्डारो को जला देना
3)समान ढोने के साधनो को जला देना
4)हथियारों को जला कर नष्ट कर देना
5)शत्रु के ऊपर आग फेंकना लेकिन इन सभी के लिए अपने पास आग लगाने का सामान जरूर रखें | इसी तरह आपको खुद के अंदर भी अपनी जीत को पाने की आग होनी चाहिए जो किसी के बुझाने से न बुझे | जिस तरह सेना को आग से युद्ध करने के तरीकों के बारे में सारी जानकारी होना आवश्यक है उसी तरह आपको भी अपनी मंज़िल और उसके रास्ते के बारे में पूरी समझ होनी चाहिए | Sun Tzu कहते है की पहले राजा सभी बातों की आधारशिला रखता है और फिर उस पर काम करने की शुरुआत करता है|
जिस तरह क्रोध को ख़ुशी से बदला जा सकता है , हानि को लाभ से हटाया जा सकता है| उसी तरह पूरे मन से कोशिश करने से सफलता भी प्राप्त की जा सकती है | परन्तु एक बार अगर कोई राज्य नष्ट हो जाये तो उसे दोबारा नहीं बनाया जा सकता| इसी तरह एक बार बाज़ी आपके हाथ से निकल गयी तो फिर पता नहीं होता की वो वापस हमारे हाथ में आएगी या नहीं इसलिए कोशिश करें की जब काम करने का सही वक़्त हो उसी वक़्त काम को पूरा कर दें | हमेशा सतर्क रहे |
13.THE USE OF SPIES(गुप्तचरों का प्रयोग)
Sun Tzu लिखते है की अपने विरोधी के बारे में जानकारी केवल दुसरे आदमियों से ही प्राप्त की जा सकती है जिन्हे हम गुप्तचर कहते है |
गुप्तचर 5 तरीके के होते है…
1)स्थानीय गुप्तचर यानी शहर के लोग|
2)आंतरिक गुप्तचर यानी शत्रु के ही अधिकारी |
3)परिवर्तित गुप्तचर यानी ये शत्रु के गुप्तचरों पर नियंत्रण रखते है और हमारे लिए काम करते है |
4)झूठे गुप्तचर यानी जो हमारी बाते शत्रु तक पहुंचाते है |
5)सक्रिय गुप्तचर जो शत्रु के पक्ष से सूचना एकत्र करते है और दुसरे पक्ष को देते है |
Sun Tzu कहते है की अगर आपके पास सभी तरह के गुप्तचर एक साथ हो तो राजा को कोई हरा नहीं सकता और कोई भी गुप्त तंत्र को तोड़ नहीं सकता | लेकिन फिर भी गुप्तचरों ज्यादा घनिष्ठ सम्बन्ध नहीं बनाने चाहिए |
बहुत ज्यादा खुश होकर उन्हें बड़े बड़े पुरस्कार न दें और नाराज़ होकर उनकी अवहेलना भी नहीं करनी चाहिए| गुप्तचरों के बारे में पूरी जानकारी रखें | उनकी बताई हुई सभी बातों को एक बार खुद भी जांच लेना जरूरी होता है| यदि कोई गुप्तचर बेईमानी करे तो उसे मार देना ही उचित होता है | अगर कोई शत्रु का गुप्तचर हमारी जानकारी लेने आया है तो उसे ढूंढ कर लालच देकर मनाने की कोशिश करनी चाहिए ताकि वो हमारे लिये काम करने लगे | सबसे अच्छा राजा वही होता है जो सेना के सबसे बुद्धिमान व्यक्ति को इस काम के लिए निर्धारित करता है | गुप्तचर बहुत जरूरी होता है क्यों की आधे से ज्यादा जानकारी हमें उन्ही के द्वारा प्राप्त होती है | ये तो बात हुई किसी राज्य के गुप्तचरों के बारे में | अब में आपको बताता हूँ की हमारे गुप्तचर कौन होते है हमारे सबसे सही गुप्तचर होते है हमारे कान ,आँख ,और दिमाग मतलब हमारी सभी इन्द्रियां | क्यों की इन्ही के द्वारा हम अपने जीवन में अपने खिलाफ या अपने पक्ष में बोली गयी सभी बातों को सुन सकते है और देख सकते है| इन्ही के द्वारा हम अपनी सफलता और आलोचना दोनों का शोर सुन सकते है | और सबसे बड़ी बात ये है की हमारे ये गुप्तचर हमें कभी धोखा नहीं देंगे| किसी अन्य की पास जाने की कोई चिंता नहीं होगी | कभी झूठ नहीं बोलेंगे तो हमारे मन में कभी ये शक नहीं रहेगा की कहीं हम किसी गलत जानकारी पर तो काम नहीं कर रहे है | इसलिए हमेशा अपने आप पर पूरा विश्वास रखें | जैसे राजा गुप्तचर रखा करते थे वैसे ही आज भी कई लोग बहुत से कामो के लिए जासूसों को नियुक्त करते है अगर आप सफलता के रास्ते में जासूसी की जरुरत समझते है तो आप भी ऐसा कीजिये | क्यों की अपने लिए कुछ भी करने में कोई बुराई नहीं है |
बस इतना ध्यान रखिये की इस रास्ते में किसी का दिल न दुखाएं , किसी से बुरा व्यवहार न करें और सभी का सम्मान करें ताकि सभी लोग आपका भी सम्मान करें | जब सफलता मिल जाये तो अपने अंदर कभी घमंड न आने दें | जिन भी लोगो ने आपका सहयोग किया उन सभी का शुक्रिया अदा करें क्यों की सहयोग के बिना आज के जमाने में सफलता शायद मिल ही नहीं सकती | फिर चाहें वो मदद भावनात्मक हो या Financially किसी ने आपका सपोर्ट किया हो |
इसी के साथ हमारा यह वीडियो समाप्त होता है | मुझे उम्मीद है कि आपको यह वीडियो पसंद आया होगा और आपने इस वीडियो में बताई गई बातों से बहुत कुछ सीखा होगा | हमारे इस वीडियो को लाइक और शेयर करें और हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें | हमारे इस वीडियो को देखने के लिए और अपना कीमती समय हमें देने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया |